केरलम: CMRL मामले में ED का बड़ा एक्शन, पूर्व CM पिनाराई विजयन के घर समेत 10 ठिकानों पर रेड

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) मंथली पेमेंट मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास सहित 10 ठिकानों पर छापेमारी की है। केरल हाई कोर्ट द्वारा जांच जारी रखने की अनुमति मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार 27 मई को कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) के मंथली पेमेंट मामले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच एजेंसी ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ED के अधिकारियों ने तिरुवनंतपुरम स्थित उनके किराए के घर और कन्नूर स्थित उनके निजी आवास पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई राज्य की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर रही है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री का नाम शामिल है।

विभिन्न ठिकानों पर सघन तलाशी

ED की यह कार्रवाई केवल पूर्व मुख्यमंत्री तक ही सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने इस मामले से जुड़े विभिन्न कार्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के परिसरों की भी तलाशी ली। इसमें CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था का आवास और पूर्व मंत्री मोहम्मद रियास का कोझिकोड स्थित घर भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। तिरुवनंतपुरम में विजयन के किराए के आवास पर भी गहन जांच की गई ताकि मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों और सबूतों को इकट्ठा किया जा सके।

केरल हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

ED की यह ताजा कार्रवाई केरल हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद हुई है जिसमें अदालत ने एजेंसी को मामले की जांच जारी रखने की स्पष्ट अनुमति दी थी। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने कुछ दिन पहले ही CMRL मंथली पेमेंट मामले में जांच रोकने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। ये याचिकाएं CMRL के एमडी ससिधरन कार्था, मुख्य वित्त अधिकारी केएस सुरेश कुमार, अंजू राहेल और चंद्रशेखरन सहित अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर की गई थीं। कोर्ट ने कंपनी की उस अपील को भी स्वीकार नहीं किया जिसमें हाई कोर्ट में अपील करने के लिए एक सप्ताह का समय बढ़ाने की मांग की गई थी।

भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

इस पूरे मामले की शुरुआत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की जांच के बाद हुई थी। SFIO की जांच में यह पाया गया कि वीणा विजयन के स्वामित्व वाली एक कंपनी को कथित तौर पर उन सेवाओं के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया गया था जो कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं और इस मामले में रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के व्यापक आरोप लगाए गए हैं। जब ED ने समन जारी किए और तलाशी शुरू की, तो कंपनी के अधिकारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और पूछताछ के नाम पर उत्पीड़न का आरोप लगाया और उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी के खिलाफ ED की जांच को उचित ठहराने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को नहीं माना।

लेन-देन की वैधता और जांच का घटनाक्रम

आयकर विभाग के इंटरिम बोर्ड फॉर सेटलमेंट की जांच के बाद इन वित्तीय लेन-देन की वैधता पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में पाया गया कि इन लेन-देन को कारोबारी खर्च के रूप में वैध नहीं माना जा सकता और इन निष्कर्षों के आधार पर, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने जनवरी 2024 में SFIO जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद अप्रैल 2024 में ED ने CMRL के अधिकारियों को समन जारी किया। ED ने हाई कोर्ट में दलील दी कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत बिना FIR के भी कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी ने यह भी जानकारी दी कि SFIO ने अप्रैल 2025 में पहले ही इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली थी। वर्तमान में ED की टीमें विभिन्न ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच कर रही हैं ताकि इस कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।