Goa Nightclub Fire / गोवा नाइट क्लब अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट से बड़ा झटका

गोवा के अरपोरा नाइट क्लब अग्निकांड मामले में लूथरा ब्रदर्स को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने सौरभ और गौरव लूथरा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. गोवा सरकार ने आरोपियों पर थाईलैंड भागने और जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया, जबकि बचाव पक्ष ने धमकियों और बदले की कार्रवाई का हवाला दिया.

गोवा के अरपोरा स्थित नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में आरोपी लूथरा ब्रदर्स, सौरभ और गौरव लूथरा को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. यह फैसला गोवा सरकार और बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा दी गई विस्तृत दलीलों के बाद आया है, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और सबूत पेश किए.

गोवा सरकार की दलीलें: जांच में असहयोग और विदेश पलायन

सुनवाई के दौरान, गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने लूथरा ब्रदर्स पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि आग लगने की घटना के तुरंत बाद आरोपी थाईलैंड भाग गए और उन्होंने जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया. वकील ने स्पष्ट किया कि 7 दिसंबर को सुबह सवा 1 बजे, आग लगने के ठीक बाद, आरोपियों. ने 'मेक माई ट्रिप' से लाखों रुपये की टिकटें बुक करके इंडिगो फ्लाइट से थाईलैंड के लिए उड़ान भरी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि थाईलैंड में उनका कोई व्यावसायिक काम नहीं था, जैसा कि बचाव पक्ष ने दावा किया था.

लाइसेंस की वैधता और गलत जानकारी

गोवा सरकार के वकील ने यह भी बताया कि नाइट क्लब के ट्रेड लाइसेंस 2023 में ही समाप्त हो चुके थे और उन्हें नवीनीकृत नहीं कराया गया था. उन्होंने कहा कि लीज के लिए दोनों भाइयों ने आवेदन किया था. बचाव पक्ष के इस दावे को भी खारिज कर दिया गया कि वे केवल लाइसेंसी थे और व्यवसाय का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर होता था. वकील ने बताया कि सौरभ लूथरा सिग्नेटरी हैं, जो यह दर्शाता है कि वे सीधे तौर पर व्यवसाय से जुड़े थे.

जांच से बचने का प्रयास

वकील ने आगे बताया कि जब पुलिस अगले दिन उनके घर गई, तो उनकी मां ने उनके ठिकाने के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया, और उनके वकील ने भी यही बात दोहराई और घटना के तुरंत बाद गायब हो जाना उनके आचरण पर सवाल उठाता है. इसी आधार पर कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किए, 7 दिसंबर को लुक आउट नोटिस और 9 दिसंबर को इंटरपोल ने ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया. इंडिगो एयरलाइंस ने भी सौरभ और गौरव लूथरा की यात्रा संबंधी जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई.

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जानमाल का नुकसान

फायर डिपार्टमेंट ने कोर्ट को सूचित किया कि बार के लिए कोई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं लिया गया था और बार में आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था, जो सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है. वकील ने कहा कि कोर्ट के सामने गलत जानकारी रखी गई और आरोपी जांच से भाग रहे हैं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस घटना में 25 लोगों की जान गई है. आरोपियों की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी सही जानकारी नहीं दी गई, और यह दावा कि वे अचानक विदेश यात्रा पर जा सकते हैं लेकिन जांच में सहयोग के लिए नहीं आ सकते, संदिग्ध है.

लूथरा ब्रदर्स के वकील की दलीलें: धमकियां और बदले की कार्रवाई

लूथरा ब्रदर्स के वकील तनवीर मीर ने घटना को दुखद बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि घटना के बाद उनके मुवक्किल और उनके परिवार को हर तरफ से जान से मारने और जला देने की धमकियां मिल रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद पूरी गोवा राज्य मशीनरी "बदले की कार्रवाई" में लग गई और उन्होंने बताया कि उनके दो रेस्टोरेंट/क्लब पर बुलडोजर चला दिया गया और प्रॉपर्टी सील कर दी गई. ऐसी स्थिति में, उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए कहीं भी जाएगा. वकील मीर ने इस बात का खंडन किया कि उनके मुवक्किल फरार थे, यह कहते हुए कि अगर वे फरार होते तो कोर्ट में पेश नहीं होते. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें रात में ही सुरक्षा दे दी. जाती, तो वे सुबह की पहली किरण के साथ भारत में होते. उन्होंने गोवा पुलिस द्वारा एक दिन में ही गैर-जमानती वारंट जारी करने और घर, ईमेल या मोबाइल पर कोई नोटिस न देने पर सवाल उठाया, इसे "बदले की कार्रवाई" का हिस्सा बताया.

व्यवसाय संचालन और विदेश यात्रा का कारण

मीर ने स्पष्ट किया कि घटना के समय दोनों याचिकाकर्ता वहां मौजूद नहीं थे और उन्होंने कहा कि वे लाइसेंसी हैं, इसलिए हस्ताक्षर वही करेंगे, लेकिन दैनिक संचालन स्थानीय प्रबंधन देखता था. उन्होंने बताया कि उनके पूरे देश में 14 से अधिक रेस्टोरेंट हैं और दिल्ली से यह तय नहीं होता कि वहां क्या पकेगा; ऑपरेशन मैनेजर ही निर्णय लेते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि वे गोवा केवल दो बार गए थे. फुकेट में उनके व्यवसाय होने की बात को गोवा पुलिस ने गलत बताया, लेकिन मीर ने जोर देकर कहा कि वहां उनका व्यवसाय है और 6 दिसंबर को उन्होंने एक ट्रैवल एजेंट को आवश्यक व्यावसायिक मीटिंग के लिए टिकट बुक करने के लिए फोन किया था, और दुर्भाग्य से उसी रात घटना घट गई.

जांच में सहयोग की इच्छा और सुरक्षा की मांग

वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल भाग नहीं रहे हैं और भारत आकर जांच का सामना करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें थाईलैंड में "लिंचिंग" का डर है. उन्होंने राज्य सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें केवल भारत वापस आने तक के लिए राहत चाहिए, जिसके बाद वे गोवा की कोर्ट में जा सकते हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल की संभावना पर जोर दिया और बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की बात भी कही. उन्होंने कोर्ट से अपने क्लाइंट के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की, क्योंकि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्हें गिरफ्तारी के बाद भीड़ द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने का डर है.

कोर्ट का फैसला और आगे की राह

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, रोहिणी कोर्ट ने लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इस फैसले के बाद, लूथरा ब्रदर्स को अब गोवा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना होगा या उच्च न्यायालय में अपील करनी होगी. उनके वकील ने पहले ही संकेत दिया था कि चाहे कोर्ट का जो भी फैसला हो, उनके क्लाइंट भारत वापस आ जाएंगे और ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल की मियाद खत्म होते ही पुलिस के सामने सरेंडर कर देंगे, बशर्ते उन्हें सुरक्षा मिले. यह मामला गोवा नाइट क्लब अग्निकांड की जांच में एक महत्वपूर्ण. मोड़ है, और अब लूथरा ब्रदर्स को कानून का सामना करना होगा.

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