विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन की भविष्य की रणनीति को लेकर कई बड़े खुलासे किए। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए खरगे ने बताया कि गठबंधन के सभी घटक दल अब हर 2 महीने में एक बार बैठक करेंगे ताकि आपसी तालमेल बना रहे। इसी कड़ी में गठबंधन की अगली बड़ी बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कुल 25 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया, जिसमें उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन जैसे दिग्गज नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी सहमति जताई।
बैठक में लिए गए 5 बड़े और महत्वपूर्ण फैसले
इस बैठक में मुख्य रूप से 5 मुद्दों पर आम सहमति बनी है, जो आने वाले समय में विपक्ष के एजेंडे को तय करेंगे। पहला फैसला यह लिया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में कथित हेरफेर के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक औपचारिक पत्र लिखा जाएगा। विपक्ष का मानना है कि चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, इसलिए न्यायपालिका का हस्तक्षेप जरूरी है। दूसरा बड़ा फैसला शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। गठबंधन का आरोप है कि उनके कार्यकाल में NEET और CBSE परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, जिसके लिए उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
आर्थिक स्थिति और संसदीय समन्वय पर जोर
तीसरे बिंदु के रूप में, इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। चौथे फैसले के तहत यह तय हुआ कि गठबंधन की एकजुटता को जमीन पर उतारने के लिए हर दो महीने में बैठकें अनिवार्य होंगी, जिसकी शुरुआत अगस्त में हैदराबाद से होगी। पांचवां और अंतिम फैसला संसद के भीतर समन्वय को लेकर है। मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरेंगे और इसके लिए प्रतिदिन सुबह नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी ताकि सदन में विपक्ष की आवाज एक सुर में सुनाई दे।
राजनीतिक चुनौतियां और भविष्य की राह
मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के दौरान 17 अप्रैल 2026 की तारीख का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन लोकसभा में विपक्ष ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े सरकार के बिलों के खिलाफ जो एकजुटता दिखाई थी, उसे और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कुशासन के कारण देश के सामने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं और खरगे ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा है और गैर-भाजपा सरकारों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने एमएसएमई (MSMEs) के संकट, निजी एकाधिकार के बढ़ने और कमजोर वर्गों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
बैठक में शामिल दल और राजनीतिक समीकरण
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार), सीपीआई (एम), सीपीआई, और अन्य क्षेत्रीय दलों सहित कुल 25 पार्टियां शामिल हुईं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद यह गठबंधन की पहली बड़ी बैठक थी, जिसमें ममता बनर्जी ने भी शिरकत की और हालांकि, तमिलनाडु के घटनाक्रम के बाद डीएमके की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। खरगे ने स्पष्ट किया कि गठबंधन के सभी दल इन 5 बिंदुओं पर पूरी तरह सहमत हैं और वे इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे और सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
