राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित कवास क्षेत्र के काउखेड़ा गांव में एक खेत से अचानक क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) निकलने की घटना सामने आई है। यह घटना 23 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है, जब स्थानीय किसान हरजीराम खोथ अपने खेत में काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खेत के एक विशेष हिस्से से अचानक काले रंग का गाढ़ा तेल जमीन से बाहर आने लगा। देखते ही देखते यह तेल खेत के बड़े हिस्से में फैल गया, जिससे वहां खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
घटना का विवरण और प्रारंभिक कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, यह रिसाव ऐश्वर्या ऑयल फील्ड के वेलपैड नंबर 8 के अत्यंत निकट स्थित एक कृषि भूमि पर हुआ है। शुरुआत में रिसाव की गति धीमी थी, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर तेल का दबाव बढ़ गया और इसने खेत के एक बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही केयर्न वेदांता कंपनी की तकनीकी और ऑपरेशनल टीमें मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा की दृष्टि से प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और ग्रामीणों को रिसाव स्थल से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
तेल निकासी और बचाव अभियान
रिसाव को नियंत्रित करने और तेल को फैलने से रोकने के लिए कंपनी की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, तेल को एक स्थान पर एकत्रित करने के लिए लगभग 100 मीटर लंबी और गहरी खाई खोदी गई है। इस खाई में जमा होने वाले तेल को वैक्यूम पंपों की सहायता से टैंकरों में भरा जा रहा है और पिछले तीन दिनों से जारी इस अभियान में अब तक 50 से अधिक टैंकर तेल निकाला जा चुका है। हालांकि, जमीन के भीतर से तेल का निकलना अभी भी पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है, जिसके कारण बचाव कार्य निरंतर जारी है।
कृषि और पर्यावरण पर प्रभाव
किसान हरजीराम खोथ के अनुसार, इस रिसाव के कारण उनकी लगभग एक बीघा कृषि भूमि पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। खेत में खड़ी फसलें तेल की परत के नीचे दब गई हैं, जिससे उनके नष्ट होने की पुष्टि हुई है और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि क्रूड ऑयल के जमीन में समाने से मिट्टी की उर्वरता पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसान ने बताया कि तेल के रिसाव से न केवल वर्तमान फसल का नुकसान हुआ है, बल्कि भविष्य में इस भूमि पर खेती करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
तकनीकी जांच और उत्पादन निलंबन
रिसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए कंपनी के इंजीनियरों द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। एहतियात के तौर पर, संबंधित क्षेत्र की पाइपलाइनों से तेल की आपूर्ति और उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और तकनीकी टीम इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह रिसाव किसी भूमिगत पाइपलाइन में तकनीकी खराबी के कारण हुआ है या इसके पीछे कोई अन्य भूगर्भीय कारण है। जब तक रिसाव के स्रोत को पूरी तरह से सील नहीं कर दिया जाता, तब तक उत्पादन प्रक्रिया को बहाल नहीं किया जाएगा।
किसान की मांग और मुआवजा प्रक्रिया
प्रभावित किसान ने कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है। किसान का कहना है कि पूर्व में भी इस क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने अपनी मेहनत से तैयार की गई जमीन और फसल के नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता की अपील की है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि नुकसान का आकलन करने के बाद नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में, प्राथमिकता तेल के रिसाव को पूरी तरह से रोकने और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने पर है।
