सीएम भजनलाल का बड़ा फैसला: पेंशन नियमों में बदलाव और नई औद्योगिक नीति को मंजूरी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पेंशन नियमों में ढील, 2026 की औद्योगिक नीति और जल संरक्षण अभियान जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार 22 मई की देर शाम को कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने मुख्य रूप से पेंशन नियमों में सरलीकरण, नई औद्योगिक नीति को मंजूरी और जल एवं ऊर्जा संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इन निर्णयों का उद्देश्य राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है।

पेंशन नियम 1996 में तीन बड़े बदलाव

राज्य सरकार ने राजस्थान पेंशन नियम 1996 में तीन महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिससे लाखों पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिलेगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दिव्यांग बच्चों के लिए किया गया है। अब दिव्यांग बच्चों को हर 3 साल में विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करने की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल एक बार ही यह सर्टिफिकेट देना होगा, जिससे उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

पेंशनर्स की सुविधा के लिए अब मोबाइल ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके सालाना जीवित प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, अब नॉन-गैजेटेड ऑफिसर भी अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) के जरिए साइन इन करके किसी पेंशनर का जीवित होने का प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे और पहले इसके लिए दो राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) के हस्ताक्षर अनिवार्य होते थे, लेकिन अब केवल एक राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर से ही काम चल जाएगा। इन बदलावों से पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सरल और सुलभ हो जाएगी।

नई औद्योगिक विकास नीति 2026 और आर्थिक लक्ष्य

कैबिनेट ने राजस्थान को 30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ नई औद्योगिक विकास नीति 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। यह नीति अगले 25 वर्षों तक राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने का मुख्य आधार बनेगी। इस नीति की खास बात यह है कि इसे जिलावार लागू किया जाएगा ताकि हर क्षेत्र का समान विकास हो सके। सरकार ने वेयरहाउस, आईटी सर्विसेज, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर (GCC) और लॉजिस्टिक को भी अब उद्योग का दर्जा दे दिया है।

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस नीति में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), AVGC और एयरोस्पेस जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जयपुर की ज्वेलरी, बाड़मेर के हैंडीक्राफ्ट और बगरू व सांगानेर के टेक्सटाइल को क्लस्टर और डिजिटल सपोर्ट दिया जाएगा। औद्योगिक निवेश के तहत जेके सीमेंट को रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए 71 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है, जिसकी प्रोजेक्ट लागत 212 करोड़ रुपये है। वहीं, डालमिया सीमेंट को उसके प्लांट के लिए 121 हेक्टेयर जमीन डीएलसी की दोगुनी दरों पर देने का निर्णय लिया गया है।

जल संरक्षण, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र के निर्णय

प्रदेश में जल संकट से निपटने के लिए 25 मई से 5 जून तक बंधे गंगा जल संरक्षण जन अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री इस अभियान की शुरुआत भरतपुर में गंगा माता के मंदिर से करेंगे। इस अभियान के तहत नए जल संचय ढांचों का निर्माण किया जाएगा और पुराने जल स्रोतों व नालों की सफाई की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियालो राजस्थान अभियान के तहत प्रदेश में 19 करोड़ से ज्यादा वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, कृषि सेवा के सेवा नियमों में संशोधन को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान को अग्रणी बनाने के लिए जैसलमेर के फतेहगढ़ और घटा रूपों, बाड़मेर की शिव तहसील के मुंगेरिया गांव और बीकानेर की पूगल तहसील के करणीसर भटियां व बज्जू गांव में बड़े पैमाने पर जमीन आवंटन को मंजूरी दी गई है। बैठक के अंत में भीषण गर्मी को देखते हुए बिजली और पानी की आपूर्ति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर स्थिति का जायजा लें और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। डीजल की जरूरतों को लेकर भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है ताकि आपूर्ति बाधित न हो।