राजस्थान पंचायत निकाय चुनाव: हाईकोर्ट में कल अहम सुनवाई, तारीखों पर सस्पेंस

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर कल 20 जुलाई को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। सरकार 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच चुनाव कराने का रोडमैप पेश कर सकती है, जबकि कोर्ट पहले ही देरी पर नाराजगी जता चुका है।

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों के भविष्य को लेकर कल यानी सोमवार 20 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह स्थानीय स्वशासन की दिशा में अगला कदम तय करेगी। अदालत इस दौरान चुनाव की संभावित समयसीमा, ओबीसी सर्वे की वर्तमान स्थिति और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग से जवाब तलब करेगी। इन सभी संस्थाओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी ताकि चुनाव प्रक्रिया को बिना किसी और देरी के आगे बढ़ाया जा सके।

चुनाव का प्रस्तावित रोडमैप और ओबीसी आरक्षण

सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से पंचायत और निकाय चुनाव 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच संपन्न कराने की तैयारी का एक विस्तृत रोडमैप पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत ओबीसी सर्वे और उसके बाद होने वाली आरक्षण प्रक्रिया के पूरा होने पर ही निर्भर करेगी। ओबीसी आयोग की ओर से अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंपे जाने की संभावना जताई गई है। इस रिपोर्ट के प्राप्त होने के बाद ही आरक्षण की लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग को जब एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों की पूरी जानकारी मिल जाएगी, उसके तुरंत बाद ही आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम तैयार कर उसकी घोषणा की जाएगी।

हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी और अधिकारियों की उपस्थिति

चुनावों में लगातार हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट पहले ही अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर कर चुका है। पिछली सुनवाइयों के दौरान अदालत ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछे थे कि आरक्षण की लॉटरी निकालने की जिम्मेदारी किसकी है और यदि अदालती आदेशों का समय पर पालन नहीं होता है, तो किस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने एक बड़ी चेतावनी देते हुए यह भी कहा था कि यदि संबंधित एजेंसियां निर्धारित समय में चुनाव कराने में विफल रहती हैं, तो अदालत स्वयं एक जज नियुक्त कर चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराने का आदेश दे सकती है। इसी गंभीरता को देखते हुए, कल की सुनवाई में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े राज्य सरकार के सभी संबंधित उच्चाधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालती कार्यवाही की अब तक की समयरेखा

इस मामले में अब तक का घटनाक्रम और अदालती आदेशों का सिलसिला इस प्रकार रहा है:

  • 18 अगस्त 2025: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि समय पर चुनाव संपन्न कराना राज्य निर्वाचन आयोग की एक संवैधानिक जिम्मेदारी है।
  • 20 सितंबर 2025: चुनाव आयोग को हर हाल में समय पर चुनाव कराने के कड़े निर्देश जारी किए गए थे।
  • 14 नवंबर 2025: अदालत ने 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण करने का आदेश दिया था।
  • दिसंबर 2025: राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष एक औपचारिक अंडरटेकिंग दी थी कि वे समय पर चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • 22 मई 2026: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि ग्राम पंचायतों और नगर निकायों सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव हर हाल में 31 जुलाई 2026 तक संपन्न करा लिए जाएं।

अब कल की सुनवाई में यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि क्या सरकार और चुनाव से जुड़े आयोग 31 जुलाई की समयसीमा के बाद का जो नया रोडमैप पेश कर रहे हैं, उसे अदालत स्वीकार करती है या नहीं। राजस्थान के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बहाल करने के लिए कल का दिन मील का पत्थर साबित हो सकता है।