बड़ा फैसला, यूक्रेन में छह सौ साठ किलोमीटर लंबा सुरक्षा क्षेत्र बनाएगा रूस, पुतिन की दो टूक - समझौता नहीं होगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में छह सौ साठ किलोमीटर लंबा सुरक्षा क्षेत्र बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की शांति वार्ता में इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है, जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में एक बड़ा सुरक्षा क्षेत्र यानी सिक्योरिटी जोन बनाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही पुतिन ने यह भी बिल्कुल साफ कर दिया है कि भविष्य में जब कभी भी यूक्रेन के साथ शांति वार्ता होगी, तो इस सुरक्षा क्षेत्र के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का कोई समझौता या मोलभाव नहीं किया जाएगा। रूस के राष्ट्रपति का यह कड़ा बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और युद्ध के मैदान में एक बड़े बदलाव के संकेत देता है, जिसने दुनिया भर के देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

सैन्य कमान पोस्ट से राष्ट्रपति पुतिन का सख्त संदेश

शुक्रवार को विशेष रूप से सैन्य वर्दी पहनकर एक मिलिट्री कमांड पोस्ट पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश के सैन्य नेतृत्व और मीडिया के सामने अपनी बात रखी और उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बेहद अहम कदम रूस के कुर्स्क इलाके में यूक्रेन की दो हजार चौबीस से दो हजार पच्चीस के दौरान हुई घुसपैठ के जवाब में उठाया गया है। पुतिन के अनुसार, रूस अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य के तहत यह लगभग छह सौ साठ किलोमीटर लंबा सिक्योरिटी जोन तैयार किया जा रहा है। रूस के आधिकारिक आंकड़ों और बयानों के मुताबिक, इस प्रस्तावित और निर्माणाधीन क्षेत्र का लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्सा अभी वर्तमान में सीधे तौर पर रूस के पूर्ण नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र में आता है।

रूसी सेना को सौंपे गए थे दो मुख्य और रणनीतिक लक्ष्य

मिलिट्री कमांड पोस्ट पर अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विस्तार से बताया कि संघर्ष की शुरुआत में रूसी सशस्त्र सेना को विशेष रूप से दो बड़े काम और रणनीतिक लक्ष्य सौंपे गए थे। पहला अहम लक्ष्य यह था कि रूस की अपनी संप्रभु भूमि से सभी यूक्रेनी सैनिकों और विदेशी घुसपैठियों को पूरी तरह से बाहर खदेड़ दिया जाए और वहीं, दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों में एक पुख्ता और impenetrable सिक्योरिटी जोन स्थापित करना था, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी घुसपैठ को पूरी तरह से रोका जा सके। पुतिन ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि रूसी सेना इन दोनों ही कठिन लक्ष्यों पर बहुत ही सफलतापूर्वक और तेजी से काम कर रही है। रूस का यह अंतिम और स्पष्ट लक्ष्य है कि वह अपने सीमावर्ती इलाकों को भविष्य के सभी संभावित खतरों से पूरी तरह और हमेशा के लिए सुरक्षित कर ले।

सिक्योरिटी जोन के निर्माण के लिए रूस की रणनीतिक योजनाएं

यद्यपि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अतीत में भी सीमा पर सुरक्षा क्षेत्र या सिक्योरिटी जोन बनाए जाने की बात कही थी, लेकिन इस बार उन्होंने पहली बार इस जोन की निश्चित लंबाई का आधिकारिक खुलासा किया है और साथ ही यह भी दोहराया है कि इस विशिष्ट मुद्दे पर भविष्य में होने वाली किसी भी शांति वार्ता के दौरान कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी और व्यापक योजना को पूरी तरह से जमीन पर उतारने के लिए, रूस को अनिवार्य रूप से यूक्रेन के सुमी और खारकीव क्षेत्रों में जमीन पर मजबूत नियंत्रण हासिल करना होगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि रूस ने दो हजार बाईस में यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान और युद्ध शुरू करने के बाद से इन दोनों विशिष्ट क्षेत्रों को अपने आधिकारिक भूभाग में शामिल करने का कोई औपचारिक दावा नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक रूप से इन क्षेत्रों पर नियंत्रण इस योजना का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।

यूक्रेन के अन्य क्षेत्रों में रूसी सेना की सैन्य स्थिति और प्रगति

अपने हालिया संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के भीतर चल रहे अन्य मोर्चों पर रूसी सेना की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की और उन्होंने बताया कि रूसी सेना को वर्तमान में यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र के दस प्रतिशत से कुछ अधिक हिस्से और जापोरिज्जिया क्षेत्र के सोलह रुपये पचास पैसे प्रतिशत यानी सोलह दशमलव पांच प्रतिशत हिस्से पर अपना पूर्ण कब्जा करना अभी बाकी है। इसके अलावा, पुतिन ने यूक्रेन के विभिन्न सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों और परिवहन प्रतिष्ठानों पर रूसी सशस्त्र बलों द्वारा किए जा रहे सटीक और विनाशकारी हमलों की खुलकर तारीफ की और साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रूस की अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली यानी एयर डिफेंस को और अधिक आधुनिक तथा मजबूत बनाने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि देश की आकाशीय सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अमेरिका के साथ डील और कूटनीतिक तनाव

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह आक्रामक और कड़ा बयान ऐसे बेहद संवेदनशील समय में सामने आया है, जब एक तरफ युद्ध को समाप्त करने या नियंत्रण में लाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का दौर लगातार जारी है। गौरतलब है कि ठीक पिछले हफ्ते ही रूस और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता हुआ था, जिसके तहत रूस से अमेरिका को डीजल बेचने का सौदा तय किया गया था और इस अमेरिकी-रूसी व्यापारिक समझौते के सामने आने के बाद से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच के कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर से भारी तनाव और खटास बढ़ती हुई नजर आ रही है। दोनों नेताओं के बीच असहजता अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गई है।

युद्ध के मैदान और साइबर स्पेस में लगातार जारी है संघर्ष

जमीनी कूटनीति और बयानों के खेल के साथ-साथ युद्ध के मैदान में भी हिंसा और हमलों का दौर लगातार जारी है। पिछले नौ दिनों के भीतर ही यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के कई महत्वपूर्ण डेटा सेंटरों और एक बेहद बड़ी तेल रिफाइनरी को अपने हमलों का मुख्य निशाना बनाया है। इसके जवाब में, रूसी सेना भी यूक्रेन के प्रमुख शहरों, संवेदनशील बिजली संयंत्रों और महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर लगातार भीषण हमले कर रही है, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसी बीच, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के विशेष निवेश दूत किरिल दिमित्रिएव ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया है कि रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका कई नई संयुक्त परियोजनाओं और योजनाओं पर आपसी बातचीत कर रहे हैं। इन प्रस्तावित परियोजनाओं में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले अत्याधुनिक डेटा सेंटर बनाने की एक बहुत बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना भी शामिल है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के तकनीकी और आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा दे सकती है।