India-US Tariff War / सरकार ने पहले GST से दिलाई राहत, अब टैरिफ की मुसीबत से दिलाएंगे छुटकारा

भारत सरकार ने जीएसटी में राहत देकर आम जनता को फायदा पहुंचाया है। अब सरकार ट्रंप के 50% टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों की मदद की तैयारी कर रही है। कपड़ा, गहने, चमड़ा, कृषि और इंजीनियरिंग सेक्टर को राहत देने के लिए प्रोत्साहन पैकेज और नए बाजार खोजने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।

India-US Tariff War: भारत सरकार ने हाल ही में आम लोगों को राहत देने के लिए जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) में बड़े बदलाव किए हैं। कई उत्पादों पर जीएसटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जबकि कई अन्य उत्पादों पर कर की दरों में कमी की गई है। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा, क्योंकि इससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें कम होने की उम्मीद है। यह कदम न केवल घरेलू खपत को बढ़ावा देगा, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक बोझ को भी कम करेगा।

ट्रंप के टैरिफ का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर लगाए गए 50% टैरिफ ने कई क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जुलाई में शुरूआती 25% टैरिफ के बाद, रूस से तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया। इससे कपड़ा, गहने और आभूषण, चमड़ा और फुटवेयर, कृषि, रसायन, इंजीनियरिंग उत्पाद, और समुद्री निर्यात जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर गहरा असर पड़ा है। कई सेक्टरों में निर्यात पूरी तरह सिमट गया है, जबकि कुछ जगहों पर मांग में भारी कमी देखी गई है। इससे निर्यातकों के सामने नकदी संकट, ऑर्डर रद्द होने, और आपूर्ति में देरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

सरकार की राहत योजनाएं

भारत सरकार ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जल्द ही विशेष राहत पैकेज की घोषणा हो सकती है, जिसमें निम्नलिखित उपाय शामिल होंगे:

  1. नकदी संकट का समाधान: छोटे और मध्यम निर्यातकों (MSME) की लिक्विडिटी समस्याओं को हल करने के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजनाएं, जैसे कोविड-काल में लागू इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS), दोबारा शुरू की जा सकती हैं। यह बिना जमानत के ऋण प्रदान करेगा, जिससे उद्योगों को दिवालिया होने से बचाया जा सकेगा।

  2. कार्यशील पूंजी पर दबाव कम करना: निर्यातकों को अपने उत्पादन को बनाए रखने के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। सरकार ऋण चुकाने की समय-सीमा बढ़ाने और ब्याज दरों में राहत जैसे कदमों पर विचार कर रही है।

  3. नौकरियों की सुरक्षा: टैरिफ के कारण लाखों नौकरियां खतरे में हैं, खासकर कपड़ा और समुद्री निर्यात जैसे क्षेत्रों में। सरकार का लक्ष्य इन सेक्टरों में रोजगार को बनाए रखना है।

  4. नए बाजारों की तलाश: सरकार निर्यातकों को नए वैश्विक बाजारों, जैसे यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व, और चीन, में अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए 40 से अधिक देशों में विशेष आउटरीच कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

निर्यात प्रोत्साहन मिशन

सरकार ने 2025-2031 के लिए ₹25,000 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य टैरिफ के प्रभाव को कम करना और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है। इस मिशन के तहत ई-कॉमर्स निर्यात हब, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) नीतियों में लचीलापन, और गुणवत्ता अनुपालन के लिए ₹4,000 करोड़ का निवेश शामिल है।

कोविड-स्टाइल राहत पैकेज

कोविड महामारी के दौरान MSME सेक्टर को बचाने के लिए सरकार ने प्रभावी राहत योजनाएं लागू की थीं। उसी तर्ज पर अब निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया जा रहा है। इसमें विशेष क्रेडिट सुविधाएं, जीएसटी रिफंड को आसान बनाना, और लॉजिस्टिक्स में सुधार शामिल हैं।

सरकार का दृढ़ रुख

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा। सरकार का ध्यान निर्यातकों को राहत देने के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीतियों पर है, ताकि भारतीय उद्योग आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। वाणिज्य मंत्रालय नए बाजारों की तलाश और मौजूदा व्यापार समझौतों को मजबूत करने के लिए निर्यातकों के साथ व्यापक चर्चा कर रहा है।

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