भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: अजीत डोवल ने आलोचना पर जताई कड़ी आपत्ति

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि भारत दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने अमेरिका को भारत की सार्वजनिक आलोचना कम करने की सलाह दी और व्यापार समझौते के लिए 2029 तक प्रतीक्षा करने की बात कही।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत में कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोवल ने अमेरिकी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत अपनी नीतियों पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव स्वीकार नहीं करेगा। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर गहन चर्चा चल रही थी।

डोवल का कड़ा रुख और 2029 की समयसीमा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में वाशिंगटन में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी और इस बैठक में एनएसए अजीत डोवल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच तीखी और स्पष्ट बातचीत हुई। डोवल ने कथित तौर पर कहा कि यदि अमेरिका अपनी शर्तों को थोपने की कोशिश करता है, तो भारत व्यापार समझौते के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने यानी 2029 तक इंतजार करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अतीत में भी कई प्रतिकूल अमेरिकी प्रशासनों का सामना किया है और वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा।

सार्वजनिक आलोचना और द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डोवल ने अमेरिकी पक्ष से भारत की सार्वजनिक रूप से आलोचना बंद करने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रंप प्रशासन और उनके सहयोगियों द्वारा की जाने वाली बयानबाजी से द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है। डोवल के अनुसार, यदि संबंधों को वापस पटरी पर लाना है, तो अमेरिका को भारत के आंतरिक मामलों और आर्थिक नीतियों पर टिप्पणी करने में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मानजनक संवाद ही किसी भी सफल समझौते की आधारशिला हो सकता है।

व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव नया नहीं है। टैरिफ, डेटा स्थानीयकरण और ई-कॉमर्स नियमों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक व्यापार समझौते की घोषणा की है, लेकिन पर्दे के पीछे की बातचीत काफी चुनौतीपूर्ण रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अपनी व्यापारिक सीमाओं को स्पष्ट कर दिया है और वह किसी भी ऐसी डील के पक्ष में नहीं है जो उसके घरेलू उद्योगों के हितों के खिलाफ हो।

रणनीतिक विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय

राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, अजीत डोवल का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति और आत्मविश्वास को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में अपनी शर्तों पर बातचीत करना चाहता है। विश्लेषकों के मुताबिक, 2029 तक इंतजार करने की बात कहना एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल हो सकती है ताकि अमेरिका को यह अहसास कराया जा सके कि भारत जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेगा। यह रुख दर्शाता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

हालांकि दोनों देशों ने अब आधिकारिक तौर पर व्यापार समझौते की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, लेकिन ब्लूमबर्ग के ये खुलासे बताते हैं कि कूटनीतिक गलियारों में तनाव अभी भी बना हुआ है। भारत और अमेरिका के बीच का यह व्यापारिक संतुलन आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित कर सकता है और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी प्रशासन भारत की इन चिंताओं को गंभीरता से लेता है और भविष्य में सार्वजनिक बयानबाजी में बदलाव लाता है या नहीं।

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER