India forex reserve: हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 2.07% हो गई, जो जुलाई में 1.61% थी। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% के भारी-भरकम टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि बढ़ती महंगाई उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर असर डाल सकती है। हालांकि, यह दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2-6% के लक्ष्य दायरे में है, जिससे केंद्रीय बैंक को नीतिगत दरों में तत्काल बदलाव की जरूरत नहीं पड़ सकती।
विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती
दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक ने आशाजनक खबर दी है। 5 सितंबर 2025 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.03 अरब डॉलर बढ़कर 698.26 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले सप्ताह (29 अगस्त) के 694.23 अरब डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है। इस बढ़ोतरी से भारत की आर्थिक स्थिरता को बल मिलता है, क्योंकि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आयात और बाहरी कर्ज के भुगतान में सहायता करता है।
भंडार के विभिन्न घटक
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA): यह भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो 54 करोड़ डॉलर बढ़कर 584.47 अरब डॉलर हो गया। इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राएं शामिल हैं।
सोने का भंडार: इस हफ्ते सोने का भंडार 3.53 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 90.29 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में स्थिरता और भारत की रणनीतिक खरीद को दर्शाता है।
विशेष आहरण अधिकार (SDRs): यह 3.4 करोड़ डॉलर घटकर 18.74 अरब डॉलर रहा।
आईएमएफ में रिजर्व पोजिशन: यह 20 लाख डॉलर बढ़कर 4.75 अरब डॉलर हो गया।
RBI की रणनीति: रुपये की स्थिरता
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये के मूल्य में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है। इसके लिए RBI समय-समय पर डॉलर की खरीद-बिक्री करता है। केंद्रीय बैंक का यह कदम किसी निश्चित विनिमय दर को लक्षित करने के बजाय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए होता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार RBI को इस रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करता है।
साप्ताहिक आंकड़ों का महत्व
RBI हर शुक्रवार को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी करता है, जिसमें पिछले सप्ताह का डेटा शामिल होता है। यह डेटा चार प्रमुख घटकों को दर्शाता है: विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोने का भंडार, विशेष आहरण अधिकार, और आईएमएफ में रिजर्व पोजिशन। ये आंकड़े निवेशकों, नीति निर्माताओं और विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये भारत की आर्थिक सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
