कोरोना वायरस / लहरें चुनौती नहीं हैं: अगस्त में कोविड-19 की तीसरी लहर के एसबीआई के अनुमान पर सरकार

केंद्रीय संयुक्त स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने एसबीआई रिसर्च की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें अगस्त में कोविड-19 की तीसरी लहर और सितंबर में इसके पीक की संभावना जताई गई है। अग्रवाल ने कहा, "लहरें चुनौती नहीं हैं...पहली चुनौती यह है कि हमने अभी तक दूसरी लहर को खत्म नहीं किया है...और अगली चुनौती लोगों का व्यवहार है।"

नई दिल्ली: देश में कोरोना की दूसरी लहर अब बिल्कुल थम चुकी हैं। हालांकि देश के कई इलाके अभी ऐसे हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर केंद्र से लेकर राज्यों की सरकारों की ओर से बंदोबस्त किए जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय स्टेट बैंक की ओर से तैयार एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि अगस्त तक तीसरी लहर आ सकती है, जो सितंबर तक पीक पर पहुंच जाएगी। वहीं अब एसबीआई की इस रिपोर्ट पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अपना रिएक्शन दिया है।

दरअसल, एसबीआई की 'कोविड-19: द रेस टू फिनिशिंग लाइन' नाम से पब्लिश रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि अगस्त के मिड तक कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका है। साथ ही यह भी बताया गया कि तीसरी लहर सितंबर महीने में अपने चरम पर होगी, जिस पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि लहरें कोई चुनौती नहीं हैं, चुनौती यह है कि भारत में महामारी की दूसरी लहर अभी बंद नहीं हुई है।

मंगलवार को देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति पर प्रेस ब्रीफिंग करते हुए संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि पहली चुनौती यह है कि अभी तक दूसरी लहर को थमी नहीं है और अगली चुनौती मानव व्यवहार है। जब तक लोगों का कोविड प्रोटोकॉल को नहीं मानेंगे तब तक संभावित लहर भविष्य में आती रहेंगी। उन्होंने बताया कि हम अपने व्यवहार के जरिए इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे कोविड नियमों की पालना नहीं हो रही है, जो एक चुनौती है।

अग्रवाल ने कहा कि एक संभावित लहर को देखने के बजाय तत्काल स्थानीय स्तर की कार्रवाई पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सचिव ने कहा कि अगर हम देखते हैं कि किसी विशेष क्षेत्र में कोविड-19 मामले बढ़ रहे हैं, तो हमें तत्काल प्रतिबंध लगाकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में सक्षम होना चाहिए।

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