चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका को एक "पतनशील राष्ट्र" (Declining Nation) करार दिए जाने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपनी विस्तृत सफाई पेश की है। बीजिंग से आई इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी, जिसके बाद ट्रंप ने जिनपिंग के शब्दों को एक नए परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। डोनाल्ड ट्रंप ने तर्क दिया कि शी जिनपिंग के ये शब्द वास्तव में बाइडन प्रशासन द्वारा देश को पहुंचाए गए "नुकसान" की ओर इशारा करते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका एक बार फिर विश्व की अग्रणी आर्थिक और सैन्य शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है। उन्होंने जिनपिंग के बयान को सीधे तौर पर जो बाइडन के कार्यकाल पर की गई एक टिप्पणी बताया और जोर देकर कहा कि उनके अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और बेहतर स्थिति में रहा है।
बाइडन प्रशासन पर तीखा हमला और विफलताओं का जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि शी जिनपिंग का अमेरिका की गिरावट को लेकर किया गया आकलन "100 प्रतिशत सही" था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गिरावट बाइडन प्रशासन की नीतियों का परिणाम है। ट्रंप ने बाइडन प्रशासन के प्रभाव का विस्तार से जिक्र करते हुए कमजोर सीमाओं, अत्यधिक कर (High Taxes), सामाजिक मुद्दों पर विवादास्पद नीतिगत बदलावों और व्यापक आर्थिक कुप्रबंधन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और " उन्होंने आगे आरोप लगाया कि खुले बॉर्डर, ऊंचे टैक्स, ट्रांसजेंडरों के लिए दी गई खुली छूट, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी, विविधता और समावेशन (DEI) की नीतियां, खराब व्यापार समझौते और बेलगाम अपराध के कारण देश को अपूरणीय क्षति हुई है।
ट्रंप ने गिनाईं अपने कार्यकाल की 'ऐतिहासिक' उपलब्धियां
अपनी पोस्ट के माध्यम से ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का भी जमकर बखान किया। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ट्रंप प्रशासन के उन 16 शानदार महीनों का जिक्र नहीं कर रहे थे, जब अमेरिका ने दुनिया के सामने अपना "अविश्वसनीय उदय" दिखाया था। ट्रंप ने उन विषयों की एक लंबी सूची साझा की, जिन्हें वे अपनी सफलता मानते हैं और इसमें शेयर बाजारों और 401K निवेश का सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचना, वेनेजुएला में सैन्य विजय और वहां के साथ फलते-फूलते संबंध, और ईरान का सैन्य रूप से सफाया (जो उनके अनुसार जारी रहेगा) शामिल है। उन्होंने गर्व से कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका एक बार फिर दुनिया की सबसे मजबूत सेना और एक आर्थिक महाशक्ति बन गया है। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि अन्य देशों द्वारा अमेरिका में रिकॉर्ड 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया जा रहा है, जो इतिहास में एक मील का पत्थर है।
रोजगार बाजार और सामाजिक नीतियों पर रुख
ट्रंप ने अपने दावों को मजबूती देते हुए कहा कि उनके समय में अमेरिका का रोजगार बाजार इतिहास में सबसे अच्छा रहा है, जिसमें पहले से कहीं अधिक लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से "देश को बर्बाद करने वाली" विविधता और समावेशन (DEI) नीतियों के अंत को अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताया। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में ऐसी कई अन्य चीजें हुईं जिन्हें आसानी से सूचीबद्ध करना असंभव होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वयं उन्हें इतने कम समय में मिली इन अभूतपूर्व सफलताओं पर बधाई दी थी। ट्रंप के अनुसार, उनके प्रयासों ने अमेरिका को पतन की गर्त से बाहर निकाला है और उसे फिर से वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में ला खड़ा किया है।
विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र और चीन के साथ संबंध
अपने वक्तव्य के समापन में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब पतन की स्थिति से पूरी तरह बाहर निकल चुका है और वैश्विक स्तर पर फिर से अपने प्रमुख स्थान पर आ गया है और ट्रंप ने स्वीकार किया कि दो साल पहले अमेरिका वास्तव में एक पतनशील राष्ट्र था और इस बिंदु पर वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूरी तरह सहमत हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि अब स्थिति बदल चुकी है और संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन गया है। ट्रंप ने भविष्य के प्रति आशावाद जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में चीन के साथ अमेरिका के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत और बेहतर होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जिनपिंग की टिप्पणी केवल बाइडन के चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान हुए नुकसान तक सीमित थी। उन्होंने दोहराया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने अपनी खोई हुई गरिमा वापस पा ली है और अब वह एक बार फिर से वैश्विक मंच पर एक आर्थिक और सैन्य महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है।
