शी जिनपिंग का भारत दौरा: गलवान झड़प के बाद पहली बार ब्रिक्स समिट के लिए आएंगे चीनी राष्ट्रपति

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं। गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा, जिसके लिए भारत ने औपचारिक न्योता भेजा है।

भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बड़ा मोड़ आने की संभावना दिखाई दे रही है। दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से कभी नीम नीम तो कभी शहद शहद जैसे रहे हैं, यानी इनमें कड़वाहट और मिठास का मिश्रण बना रहता है। गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह पहली बार होगा जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत की धरती पर कदम रखेंगे। भारत ने उन्हें इस महत्वपूर्ण यात्रा के लिए औपचारिक न्योता भेज दिया है और इस दौरे के पीछे की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना माना जा रहा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और भारत की अध्यक्षता

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर के महीने में ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति के भारत में होने वाले ब्रिक्स समिट में शामिल होने की पूरी संभावना है, क्योंकि चीन ने भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलनों का समर्थन किया है। यह महत्वपूर्ण ब्रिक्स समिट 12 और 13 सितंबर को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाली है। हालांकि शी जिनपिंग के इस भारत दौरे को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन भारत सरकार पहले ही चीनी राष्ट्रपति को इस समिट के लिए निमंत्रण पत्र भेज चुकी है।

गलवान गतिरोध के बाद जिनपिंग का ऐतिहासिक दौरा

यदि शी जिनपिंग का यह भारत दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो इसे एक अत्यंत अहम और ऐतिहासिक दौरा माना जाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि गलवान झड़प और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पैदा हुए सैन्य गतिरोध के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अक्टूबर 2019 के बाद शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा साबित होगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

जिनपिंग की पिछली भारत यात्राओं का इतिहास

शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई थी, जब वे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक समिट में शामिल होने आए थे। यह मुलाकात वुहान समिट के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई दूसरी अनौपचारिक बातचीत थी। हालांकि, उस ऐतिहासिक दौरे के लगभग छह महीने बाद ही LAC के लद्दाख सेक्टर में चीनी सेना की घुसपैठ की खबरें आईं, जिससे भारत और चीन के संबंध पिछले छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए और इस घटना के कारण दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। इससे पहले, शी जिनपिंग सितंबर 2014 में राजकीय दौरे पर भारत आए थे, तब उन्होंने अहमदाबाद और नई दिल्ली की यात्रा की थी। 2019 के बाद से उन्होंने भारत का दौरा नहीं किया है, हालांकि दोनों नेता ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और G20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का पिछला चीन दौरा

कूटनीतिक आदान-प्रदान के क्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2025 तक चीन के तियानजिन शहर गए थे। वहां उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। लगभग सात वर्षों के अंतराल में प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली चीन यात्रा थी। इससे पहले, मोदी ने 2018 में वुहान अनौपचारिक शिखर सम्मेलन और 2019 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा किया था।

रूस और तियानजिन में हुई हालिया मुलाकातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल के समय में भी कुछ महत्वपूर्ण मुलाकातें हुई हैं और दोनों नेताओं के बीच पिछली द्विपक्षीय बैठक अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान शहर में आयोजित हुई थी। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह LAC पर सैन्य गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के तुरंत बाद हुई थी। इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच हाल ही में अगस्त के महीने में तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी बातचीत हुई थी। इन मुलाकातों ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए एक सकारात्मक पृष्ठभूमि तैयार की है।