दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है क्योंकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर जवाबी हवाई हमले किए हैं। अफगान रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ये हमले विशेष रूप से पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में स्थित इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे। यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा दो दिन पहले किए गए हवाई हमलों का सीधा जवाब है, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार संघर्ष में भारी वृद्धि हुई है।
अफगान हवाई अभियान का विवरण
तालिबान प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि इस ऑपरेशन को पूरी सटीकता के साथ अंजाम दिया गया था। इस हमले का मुख्य उद्देश्य उन ISIS लड़ाकों को खत्म करना था जो कथित तौर पर इन ठिकानों का उपयोग अफगानिस्तान के भीतर नागरिकों पर आतंकवादी हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे थे। अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन हमलों में कई ठिकानों को नष्ट कर दिया गया और बड़ी संख्या में ISIS लड़ाके मारे गए। काबुल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में उनके हवाई अभियान के दौरान किसी भी आम नागरिक की जान नहीं गई है। इसके साथ ही तालिबान सरकार ने चेतावनी दी है कि वे भविष्य में भी ऐसे किसी भी स्थान को निशाना बनाना जारी रखेंगे जो अफगानिस्तान की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करेगा।
पाकिस्तान द्वारा ड्रोन मार गिराने का दावा
इन घटनाक्रमों के जवाब में, पाकिस्तानी सेना ने हवाई घुसपैठ की पुष्टि की है लेकिन घटनाओं का एक अलग विवरण पेश किया है। पाकिस्तान ने कहा कि उसके हवाई रक्षा तंत्र ने बलूचिस्तान के ऊपर हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले चार अफगानी ड्रोन का सफलतापूर्वक पता लगाया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान सेना की रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोनों को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही आधुनिक तकनीक का उपयोग करके मार गिराया गया था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और चेतावनी दी कि इस तरह की उकसावे वाली कार्रवाइयों से अफगानिस्तान के लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
हालिया हताहतों का संदर्भ
वर्तमान तनाव पिछले एक सप्ताह के दौरान हुए हिंसक आदान-प्रदान की कड़ी है। रविवार को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा के पास कई स्थानों पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों के प्रभाव को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन पाकिस्तानी ऑपरेशनों में कम से कम 28 नागरिक मारे गए और 49 अन्य घायल हुए। हालांकि, अफगान सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं। काबुल के अनुसार, पाकिस्तानी हमलों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप 36 लोगों की मौत हुई और 160 से अधिक लोग घायल हुए। तालिबान ने पाकिस्तान की इन कार्रवाइयों को निर्दोष आबादी पर किया गया कायराना हमला बताया है।
पुनर्वास केंद्र पर दुखद हमला
हाल के हमलों के इतिहास में 16 मार्च की एक विनाशकारी घटना भी शामिल है, जब पाकिस्तान ने पूर्वी काबुल में ओमिद ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर को निशाना बनाया था। यह केंद्र 2000 बेड की क्षमता वाला था और इस पर हुए हवाई हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उस विशेष हमले में 408 लोग मारे गए थे और 265 अन्य घायल हुए थे। पीड़ितों में ज्यादातर वे मरीज थे जो केंद्र में अपना इलाज करा रहे थे। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान अपनी धरती पर उन आतंकवादियों को पनाह देता है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं, लेकिन तालिबान सरकार ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।
बढ़ता तनाव और संघर्ष विराम का उल्लंघन
यह नई शत्रुता ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों ने पिछले साल अक्टूबर में हफ्तों तक चली हिंसा के बाद संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी। इस आपसी समझ का टूटना और उसके बाद हवाई हमलों का सिलसिला एक गहरी दरार का संकेत देता है। पाकिस्तान का तर्क है कि उसकी कार्रवाई केवल आतंकवादी खतरों को खत्म करने पर केंद्रित है, जबकि अफगानिस्तान इन घुसपैठों को अपनी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानता है। हमलों और जवाबी हमलों के इस चक्र ने क्षेत्रीय स्थिरता को एक नाजुक स्थिति में डाल दिया है।
