अशोक गहलोत का बड़ा बयान: सोनिया गांधी अध्यक्ष बनातीं तो मना नहीं करता, वह एक बड़ी साजिश थी

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव विवाद को फिर से हवा देते हुए इसे एक बड़ी साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि वह सोनिया गांधी के फैसले का सम्मान करते, जबकि भाजपा मंत्री जोगाराम पटेल ने उनके बयानों पर पलटवार किया है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 4 साल पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद को एक बार फिर हवा दे दी है। जयपुर में दिए गए उनके इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और गहलोत ने उस मुद्दे का जिक्र किया जिसे मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद शांत मान लिया गया था। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व उन्हें अध्यक्ष बनाना चाहता, तो वह इसके लिए कभी मना नहीं करते। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने उस समय हुए पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी साजिश करार दिया है।

सोनिया गांधी के फैसले और साजिश का दावा

अशोक गहलोत ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अगर कांग्रेस और सोनिया गांधी उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनातीं, तो क्या वह मना करते और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह हमेशा पार्टी के आदेशों का पालन करने के लिए तैयार थे। गहलोत ने कहा, "मेरे ख्याल से वह एक बड़ी साजिश थी। " उन्होंने आगे कहा कि आज लोगों को ऐसा लगता है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद पर बने रहना था, इसलिए उन्होंने विद्रोह या रीवोल्ट करवा दिया, जबकि वास्तविकता कुछ और थी।

जोगाराम पटेल का पलटवार और सचिन पायलट का जिक्र

अशोक गहलोत के इस बयान पर राजस्थान सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जोगाराम पटेल ने कहा कि जब भी सचिन पायलट का नाम किसी बड़े पद के लिए सामने आता है या उसकी संभावना बनती है, तो अशोक गहलोत पुरानी कहानियों को दोहराने लगते हैं और पटेल ने कहा कि गहलोत अक्सर होटल में बंद होने वाली कहानी फिर से सुनाने लगते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गहलोत प्रत्यक्ष रूप से सचिन पायलट पर भाजपा के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाते हैं, लेकिन अगर उनकी सरकार के दौरान ऐसी कोई घटना हुई थी, तो उन्होंने आज तक इस मामले में केस क्यों दर्ज नहीं कराया? पटेल के अनुसार, गहलोत अब अपनी ही पार्टी में दरकिनार हो चुके हैं और बिना किसी आधार के बयान दे रहे हैं।

2022 का राजस्थान सियासी संकट

यह पूरा विवाद सितंबर, 2022 के उस घटनाक्रम से जुड़ा है जब अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी चल रही थी। उस समय कांग्रेस आलाकमान चाहता था कि गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ें, लेकिन इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ता। माना जा रहा था कि गहलोत के हटने के बाद सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। हालांकि, अशोक गहलोत और उनका खेमा इस बदलाव के लिए तैयार नहीं था, जिसके कारण राज्य में एक बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया था।

विधायकों का इस्तीफा और विद्रोह

सितंबर, 2022 में जब कांग्रेस नेतृत्व ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा के लिए जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई, तो गहलोत समर्थक विधायकों ने इसका बहिष्कार कर दिया। केंद्रीय पर्यवेक्षक बैठक में विधायकों का इंतजार करते रहे, लेकिन गहलोत गुट के 90 से ज्यादा विधायक शांति धारीवाल के आवास पर एकत्र हो गए। वहां से ये सभी विधायक तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया। इन विधायकों की मांग थी कि राजस्थान का नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पसंद का ही होना चाहिए और इस घटना ने कांग्रेस आलाकमान को काफी असहज कर दिया था।

सोनिया गांधी से माफी और खरगे का चयन

विधायकों के इस खुले विद्रोह से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व काफी नाराज हुआ था। इसके बाद अशोक गहलोत ने दिल्ली जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली और खुद को कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर कर लिया और इसी घटनाक्रम के बाद मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। गहलोत के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि वह आज भी उस समय हुई घटनाओं को अपने खिलाफ एक साजिश के रूप में देखते हैं।