Israel-Hamas News / 'युद्ध के बाद हमास का गाजा में अस्तित्व नहीं रहेगा', इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने खाई कसम

इजरायल गाजा में हमास के ठिकानों पर हमले कर रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हमास को पूरी तरह खत्म करने की कसम खाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हमास से 60 दिन के युद्धविराम की अपील की, चेतावनी दी कि अस्वीकार करने से स्थिति बिगड़ेगी। हमास ने युद्ध के पूर्ण अंत की शर्त रखी।

Israel-Hamas News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि हमास का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल तब तक अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, जब तक गाजा में हमास का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता। इजरायल की सेना लगातार गाजा में हमास के ठिकानों पर हमले कर रही है, जिसे वह आतंकी गतिविधियों का केंद्र मानता है।

ट्रंप का हस्तक्षेप: 60 दिन का युद्धविराम प्रस्ताव

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक अहम बयान में कहा कि इजरायल ने 60 दिन के युद्धविराम की शर्तों पर सहमति जताई है। ट्रंप ने हमास से इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि अगर हमास ने इस समझौते को ठुकराया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ट्रंप ने इस 60 दिन की अवधि को युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में काम करने के अवसर के रूप में पेश किया। अमेरिका इजरायल और हमास दोनों पर युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और संघर्ष के अंत के लिए दबाव बढ़ा रहा है।

हमास की शर्त: युद्ध का पूर्ण अंत

हमास ने बुधवार को जवाब में कहा कि उसे मध्यस्थों के जरिए युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है और वह इस पर विचार के लिए वार्ता की मेज पर लौटने को तैयार है। हालांकि, हमास ने साफ किया कि वह केवल तभी समझौते को स्वीकार करेगा, जब यह गारंटी दी जाए कि गाजा में युद्ध पूरी तरह समाप्त होगा। हमास के अधिकारी ताहिर अल-नुनू ने कहा, "हम किसी भी ऐसी पहल को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, जो स्पष्ट रूप से युद्ध को पूर्ण अंत की ओर ले जाए।"

दोनों पक्षों के बीच तनाव

इजरायल और हमास के बीच मतभेद साफ हैं। जहां इजरायल का लक्ष्य हमास को पूरी तरह खत्म करना है, वहीं हमास युद्धविराम के बाद स्थायी शांति की मांग कर रहा है। इस बीच, गाजा में सैन्य कार्रवाइयां और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या मध्यस्थों की कोशिशें दोनों पक्षों को समझौते की मेज तक ला पाएंगी या यह संघर्ष और गहराएगा।

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