मिडिल-ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने सीजफायर को लेकर अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक जवाब दे दिया है। जानकारी के अनुसार, ईरान ने यह जवाब पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचाया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है और अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रखी है। ईरान की सरकारी मीडिया ने इस बातचीत की पुष्टि की है और स्पष्ट किया है कि तेहरान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थाई रूप से युद्ध को समाप्त करना है।
ईरान की प्राथमिकताएं और युद्ध समाप्ति की मांग
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान केवल एक अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध का पूर्ण और स्थाई अंत चाहता है। ईरान का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत का केंद्र बिंदु युद्ध को पूरी तरह से रोकना होना चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थिरता बहाल हो सके।
अमेरिकी प्रस्ताव की शर्तें और परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध
वॉशिंगटन द्वारा भेजे गए ताज़ा प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल थीं। इसमें युद्ध को समाप्त करने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेने (Rollback) का समझौता शामिल था। हालांकि, तेहरान ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह फिलहाल परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अभी चर्चा नहीं करना चाहता और इसे भविष्य के लिए टालना चाहता है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और कूटनीतिक प्रयास
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है और तेल व प्राकृतिक गैस की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान प्रस्तावित समझौते को स्वीकार करता है या नहीं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं होता है, तो ईरान पर नए सिरे से बमबारी शुरू की जाएगी। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्टज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कूटनीति को पूरा अवसर देना चाहते हैं।
व्हाइट हाउस की ओर से ईरान के इस जवाब पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे एक ईरानी तेल टैंकर पर गोलीबारी की थी, जिससे तनाव और बढ़ गया था। ट्रंप ने समझौते के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उनका रुख स्पष्ट है कि होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलना समझौते का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।
