ईरान और अमेरिका के बीच जंगी तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें लगातार कमजोर होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि ईरान के जवाब में वह कुछ भी नहीं था जिसकी उम्मीद अमेरिका कर रहा था। इस फैसले के बाद समझौते की रही-सही उम्मीदें भी लगभग खत्म हो गई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे दुनिया को फिलहाल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
शांति प्रस्ताव पर ईरान की शर्तें और ट्रंप की नाराजगी
ईरान ने शांति के लिए जो प्रस्ताव भेजा था, उसमें कई कड़ी शर्तें रखी गई थीं। ईरान की पहली मांग यह थी कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर उसे पूरा नियंत्रण दिया जाए। इसके साथ ही अमेरिका से तुरंत अपनी समुद्री नाकाबंदी हटाने, युद्ध का हर्जाना देने और जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग भी की गई थी। हालांकि, सबसे बड़ा विवाद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर पैदा हुआ। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना सारा संवर्धित यूरेनियम उसे सरेंडर कर दे, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है और ईरान ने प्रस्ताव दिया कि वह अपना यूरेनियम किसी तीसरे देश भेज सकता है, लेकिन इस गारंटी के साथ कि यदि अमेरिका ने समझौता तोड़ा तो उसे यूरेनियम वापस मिलना चाहिए। इसके अलावा, अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को 20 साल के लिए रोकने की मांग कर रहा था, जबकि ईरान केवल 5 साल के लिए सहमत हुआ।
मुख्य बिंदु और युद्ध के आंकड़े
ट्रंप और नेतन्याहू का साझा एक्शन प्लान
ईरान के अड़ियल रुख से राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा चरम पर है। खबरों के मुताबिक, ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर लंबी बातचीत की है और दोनों देश मिलकर ईरान के खिलाफ एक नए सैन्य ऑपरेशन की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना ईरानी ठिकानों पर कड़ी निगरानी रख रही है और यदि किसी ने भी यूरेनियम निकालने की कोशिश की, तो उसे उड़ा दिया जाएगा। नेतन्याहू ने भी दोहराया है कि वे ईरान से संवर्धित यूरेनियम हर हाल में निकालकर रहेंगे। दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने कमान संभाल ली है और IRGC कमांडर्स के साथ सीक्रेट बैठक कर हथियारों का उत्पादन बढ़ाने और अमेरिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी और तकनीकी चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल अब यूरेनियम हासिल करने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन का सहारा ले सकते हैं। यह ऑपरेशन नतांज और इस्फहान जैसे सुरक्षित अंडरग्राउंड ठिकानों पर केंद्रित हो सकता है और हालांकि, यह बेहद जोखिम भरा होगा क्योंकि इन साइटों के पास बारूदी सुरंगें हो सकती हैं और यूरेनियम जहरीली गैस के रूप में सिलेंडरों में रखा जाता है। इसे निकालने के लिए विशेष कंटेनरों और भारी मालवाहक विमानों की आवश्यकता होगी। IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने भी इसे एक चुनौतीपूर्ण कार्य बताया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ के अनुसार, पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों ने कूटनीति को एक और मौका देने की अपील की है, लेकिन ट्रंप प्रशासन किसी भी समय दोबारा हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरानी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अक्रामी निया ने चेतावनी दी है कि यदि दुश्मन ने फिर से गलत आकलन किया, तो उसे चौंकाने वाले परिणामों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, स्थिति यह है कि अमेरिका अपने शेष 30% लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दो हफ्ते का समय और मांग रहा है, जबकि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को तैनात कर चुका है।
