Naresh Meena News / मीणा बोले- सीएम मुझे भगत सिंह बनने को मजबूर न करें, शाम का खाना CMR में खाएंगे

झालावाड़ स्कूल हादसे के पीड़ितों के लिए नरेश मीणा आज सीएम भजनलाल शर्मा के आवास का घेराव करेंगे। समर्थकों के साथ बकरियाँ ले जाकर वे न्याय और मुआवजे की मांग करेंगे। अनशनरत मीणा ने चेतावनी दी है; भारी जनसमर्थन और पुलिस ने कुछ समर्थकों को हिरासत में लिया है, बताया।

Naresh Meena News: झालावाड़ के पिपलोदी में हुए स्कूल हादसे में मृत और घायल बच्चों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता नरेश मीणा ने आंदोलन तेज कर दिया है। आज वह अपने समर्थकों के साथ बकरियां लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आवास का घेराव करने जा रहे हैं। नरेश मीणा पिछले चार दिनों से जयपुर के शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठे हैं, और अब उन्होंने अपने आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी है।

शहीद स्मारक पर उमड़ा जनसैलाब

जयपुर के शहीद स्मारक पर नरेश मीणा के समर्थन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता जुटे हैं। रैली में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल होने वाले हैं, जबकि कांग्रेस नेता सचिन पायलट के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। शहीद स्मारक के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया है। छात्र नेता मनोज मीणा को भी महेश नगर इलाके से हिरासत में लिया गया।

नरेश मीणा की चेतावनी: "मुझे भगत सिंह बनने पर मजबूर न करें"

नरेश मीणा ने शहीद स्मारक पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "मैं गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहा हूं, लेकिन सीएम मुझे भगत सिंह बनने के लिए मजबूर न करें। अगर सरकार हमारे युवाओं को इसी तरह परेशान करती रही, तो आज का रात का खाना हम शहीद स्मारक पर नहीं, बल्कि सीएम आवास पर खाएंगे।" उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि झालावाड़ के सरकारी स्कूल में बच्चों की मौत भ्रष्टाचार के कारण हुई, और पीड़ित परिवारों को अब तक उचित न्याय और मुआवजा नहीं मिला है।

मीणा ने कहा, "जो बच्चे मरे, हो सकता है उनमें से कोई कलेक्टर, आईपीएस, या बड़ा बिजनेसमैन बनता। लेकिन सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने उनकी जिंदगी छीन ली। सिर्फ झालावाड़ ही नहीं, पूरे कोटा संभाग में स्कूलों की हालत बद से बदतर है।"

राजेंद्र सिंह गुढ़ा का आक्रोश

पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी आंदोलन में शामिल हैं और उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा, "तख्त बदल दो, ताज बदल दो, इन गुंडों का राज बदल दो। यह जो गुंडागर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।" गुढ़ा ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा, "हम शांति से आंदोलन करेंगे, लेकिन अगर कोई पुलिस वाला लाठी चलाएगा, तो हम जवाब देंगे। हमें रोकने के लिए पुलिस भी कम पड़ जाएगी।"

सरकार की घोषणा और पीड़ितों की मांग

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे में मृतक बच्चों के परिजनों के लिए 13 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायल बच्चों के लिए 1 लाख 36 हजार (गंभीर घायल) और 75 हजार 400 रुपये (साधारण घायल) की मदद की घोषणा की थी। इसके अलावा, मृतक बच्चों के परिवार के एक सदस्य को राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसाइटी (RMRS) के माध्यम से संविदा पर नौकरी देने का वादा किया गया है। हालांकि, नरेश मीणा और उनके समर्थक इसे अपर्याप्त मानते हैं और पूर्ण न्याय की मांग कर रहे हैं।

"अनशन पर बैठा-बैठा जान दे दूंगा"

नरेश मीणा ने अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्प जताते हुए कहा, "फिलहाल हम गांधीवादी तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं। अगर इसके बाद भी हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मैं यहीं अनशन पर बैठा-बैठा अपनी जान दे दूंगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मेरी मौत देखनी पड़ेगी।"

पुलिस की सख्ती और समर्थकों का उत्साह

पुलिस ने शहीद स्मारक के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है और बैरिकेडिंग के जरिए रैली को रोकने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद, नरेश मीणा के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। खास तौर पर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी है।

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