नरेश मीणा ने एसडीएम कार्यालय के बाहर झोली फैलाकर मांगी खाद की भीख

राजस्थान के बारां जिले में नरेश मीणा ने किसानों के लिए डीएपी खाद की मांग को लेकर छबड़ा एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। उन्होंने प्रशासन से खाद की भीख मांगी और मांगें पूरी न होने पर शाम 7 बजे से भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।

राजस्थान के बारां जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। बुधवार, 17 जून 2026 को नरेश मीणा अपने बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ छबड़ा एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से क्षेत्र में डीएपी खाद की भारी किल्लत को लेकर किया जा रहा है। नरेश मीणा ने इस दौरान बेहद भावुक और प्रतीकात्मक तरीका अपनाते हुए प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की। उन्होंने न केवल प्रशासन के सामने अपनी झोली फैलाई, बल्कि किसानों के हक के लिए खाद की भीख भी मांगी।

बालापुरा से पैदल मार्च और कार्यालय के द्वार पर दंडवत

इस आंदोलन की शुरुआत बालापुरा गांव से हुई, जहां से नरेश मीणा ने किसानों के साथ एक विशाल पैदल मार्च निकाला। यह मार्च विभिन्न रास्तों से होता हुआ छबड़ा उपखंड कार्यालय पहुंचा और कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही नरेश मीणा ने जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम किया। उनका यह कृत्य प्रशासन के प्रति एक विनम्र लेकिन कड़ा संदेश था कि किसान अब पूरी तरह से सरकारी तंत्र के भरोसे हैं। दंडवत प्रणाम करने के बाद वे वहीं धरने पर बैठ गए और प्रशासन से वंचित किसानों के लिए तुरंत डीएपी खाद उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग की।

झोली फैलाकर मांगी खाद की भीख

धरना स्थल पर नरेश मीणा एक अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने अपनी झोली फैला ली और वहां मौजूद अधिकारियों और जिला प्रशासन से किसानों के लिए खाद की भीख मांगने लगे। उन्होंने कहा कि मैं छबड़ा की एसडीएम मैडम और बारां के जिला कलेक्ट्रेट से यहां के किसानों के लिए डीएपी खाद की भीख मांग रहा हूं। मीणा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले किसानों से खाद उपलब्ध कराने के जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत की कमाई से खाद खरीदना चाहता है, लेकिन उसे वह भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। झोली फैलाकर बैठने का उनका यह दृश्य क्षेत्र में कृषि संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

खाद की कालाबाजारी और किसानों का आर्थिक संकट

नरेश मीणा ने धरने के दौरान प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में किसान खरीफ की फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस समय डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन सरकारी वितरण केंद्रों पर खाद का स्टॉक खत्म हो चुका है। दूसरी तरफ, निजी खाद व्यापारी इस कमी का फायदा उठा रहे हैं। मीणा ने दावा किया कि निजी व्यापारी खाद की जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं और किसानों से निर्धारित सरकारी कीमत से कहीं अधिक राशि वसूल रहे हैं और उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय पर खाद नहीं मिली तो किसान बुवाई नहीं कर पाएंगे, जिससे उनके परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

शाम 7 बजे से भूख हड़ताल की चेतावनी

प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए नरेश मीणा ने कहा कि जब तक किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल जाती और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, तब तक उनका यह धरना जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आज 17 जून 2026 की शाम 7 बजे से यह आंदोलन भूख हड़ताल में बदल जाएगा। इस भूख हड़ताल में उनके साथ हजारों किसान शामिल होंगे और मीणा ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि भूख हड़ताल के दौरान किसी भी किसान की स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि खाद की कमी के कारण फसल न बो पाना किसानों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है।