राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने राज्य में शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक (पीटीआई) की आगामी भर्ती को लेकर अपनी कमर कस ली है और बोर्ड ने इस बार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक कड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 1100 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि 13 सितंबर को प्रस्तावित परीक्षा से पहले पदों की संख्या में 500 की बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे कुल पदों की संख्या बढ़ जाएगी।
दस्तावेजों को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव
पीटीआई भर्ती 2022 के दौरान सामने आए बड़े स्तर के फर्जीवाड़े से सबक लेते हुए चयन बोर्ड ने इस बार आवेदन प्रक्रिया में ही महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। Ed) की मार्कशीट और खेल प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभ्यर्थी के पास आवेदन के समय ही वैध योग्यता और प्रमाण पत्र मौजूद हों।
बोर्ड के नए नियमों के अनुसार, चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के समय अभ्यर्थी को वही मूल दस्तावेज और प्रमाण पत्र पेश करने होंगे जो उन्होंने आवेदन के समय अपलोड किए थे। यदि सत्यापन के दौरान पेश किए गए दस्तावेज आवेदन के समय अपलोड किए गए दस्तावेजों से अलग पाए जाते हैं, तो अभ्यर्थी की पात्रता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की भिन्नता स्वीकार नहीं की जाएगी।
2022 की भर्ती में उजागर हुआ था बड़ा रैकेट
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 की पीटीआई भर्ती में फर्जी डिग्रियों और खेल प्रमाण पत्रों का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया था। इस फर्जीवाड़े के तार राजस्थान से बाहर अन्य राज्यों तक फैले हुए थे। जांच के दौरान मध्य प्रदेश की सत्यसाईं यूनिवर्सिटी और उत्तर प्रदेश की जेएस यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी और राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने इन विश्वविद्यालयों पर छापेमारी की थी और यह खुलासा हुआ था कि कई अभ्यर्थियों ने चयन की दौड़ में शामिल होने के लिए फर्जी दस्तावेज खरीदे थे।
अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज का कड़ा रुख
कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने बताया कि पिछली भर्ती में जिस तरह के खुलासे हुए, उन्हें देखते हुए इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और उन्होंने जानकारी दी कि पीटीआई भर्ती 2022 की जांच में लगभग 1200 ऐसे मामले सामने आए थे जिनमें आवेदन के समय दी गई जानकारी और वेरिफिकेशन के समय दिखाए गए दस्तावेजों में अंतर था। जब इन अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई, तो अधिकांश ने ई-मित्र की गलती का बहाना बनाया।
मेजर जनरल आलोक राज के अनुसार, यह स्पष्ट था कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा था और कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में सफल होने या चयन की संभावना दिखने के बाद फर्जी डिग्री और सर्टिफिकेट हासिल किए थे। इसी प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए अब आवेदन के समय ही दस्तावेजों को अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि बाद में कोई भी अभ्यर्थी नया या फर्जी दस्तावेज पेश न कर सके।
