इराक-कतर में तेल उत्पादन धड़ाम, क्या $135 का स्तर पार करेगा कच्चे तेल का दाम?

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इराक और कतर में तेल उत्पादन में भारी गिरावट आई है। आपूर्ति बाधित होने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें $113.75 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इराक और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों की आपूर्ति क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60% की वृद्धि दर्ज की गई है। 75 के स्तर को पार कर गया है। आपूर्ति श्रृंखला में आए इस व्यवधान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आपूर्ति का संकट

वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में सैन्य गतिविधियों के कारण मालवाहक जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है और अधिकारियों के अनुसार, इस मार्ग पर बढ़ते जोखिम के कारण परिवहन लागत में वृद्धि हुई है और आपूर्ति श्रृंखला में देरी हो रही है। इसी आपूर्ति बाधा के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर उछाल देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का दीर्घकालिक अवरोध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

कतर और इराक में उत्पादन की स्थिति

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों के बाद कतर की ऊर्जा सुविधाओं को क्षति पहुंची है। इसके परिणामस्वरूप कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता में लगभग 17% की गिरावट आई है। दूसरी ओर, इराक ने अपने तेल क्षेत्रों में 'फोर्स मेज्योर' यानी आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर दी है। बसरा ऑयल कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, वहां उत्पादन 33 lakh बैरल प्रतिदिन से घटकर केवल 9 lakh बैरल प्रतिदिन रह गया है। विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित तेल क्षेत्रों में काम रुकने से वैश्विक बाजार में तेल की कमी और गहरी हो गई है।

भारतीय और वैश्विक बाजारों पर प्रभाव

वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय कमोडिटी बाजारों पर भी देखा जा रहा है। 70% की तेजी के साथ ₹9,601 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गए। 43 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। आपूर्ति में आ रही इस कमी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा लागत में वृद्धि का संकट पैदा कर दिया है। भारतीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर व्यापक रूप से देखा जा रहा है।

वित्तीय संस्थानों के अनुमान और भविष्य की स्थिति

वित्तीय संस्था गोल्डमैन सैक्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ब्रेंट क्रूड के औसत मूल्य अनुमानों में संशोधन किया है। संस्था ने वर्ष 2026 के लिए औसत मूल्य को $77 से बढ़ाकर $85 प्रति बैरल कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च और अप्रैल के महीनों के लिए औसत मूल्य $110 रहने की संभावना जताई गई है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, यदि आपूर्ति लाइन में सुधार नहीं होता है और उत्पादन में 20 lakh बैरल प्रतिदिन की कमी बनी रहती है, तो कीमतें $135 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की उपलब्धता और उसकी लागत को प्रभावित कर रही है।