राज्य / जोधपुर राजपरिवार से क्या जादुई रिश्ता बताया सीएम अशोक गहलोत ने

Zoom News : Oct 08, 2019, 03:31 PM
जोधपुर | राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर के राज परिवार से गहरा रिश्ता बताया हैं। उन्होंने कहा है कि राजमाता कृष्णा कुमारी उन्हें पुत्रवत् मानती थीं और वे भी उनको मां के समान आदर दे​ते थे। उन्होंने कहा कि राजमाता की मेरे प्रति यह सोच थी कि मैं मारवाड़ और जोधपुर के लिए कुछ करना चाहता हूूं। उन्होंने चुनाव लड़ा और वे निर्दलीय सांसद भी बनीं। उनकी सोच हमेशा सभी समाज एवं धर्मों के प्रति समान भाव की रहती थी। 

गहलोत ने यह भी कहा कि महाराजा हनुवंतसिंहजी कला प्रेमी थे और जादू दिखाते थे। गहलोत ने कहा उनके पिता बाबू लक्ष्मणसिंह भी दिखाते थे। यह रिश्ता भी रहा है। गहलोत ने जोधपुर में सर्किट हाउस के सामने राजमाता कृष्णा कुमारी मार्ग का लोकार्पण किया और राइका बाग पैलेस में महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा आयोजित राजमाता कृष्णा कुमारी को समर्पित महाराजा हनुवन्त सिंह स्मृति व्याख्यानमाला में मुख्य अतिथि के रूप में शरीक हुए।

मुख्यमंत्री ने समारोह में कहा कि स्व. राजमाता कृष्णा कुमारी अपणायत और स्नेह की प्रतिमूर्ति थीं। उनका मेरे प्रति सदैव मातृत्व भाव रहा। गहलोत ने ऎसी शख्सियत के नाम पर मार्ग का नामकरण करने के निर्णय के लिए महापौर, नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षदों को साधुवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में जानने की प्रेरणा मिलेगी।

गहलोत ने कहा कि महाराजा हनुवन्त सिंह बहुमुखी प्रतिमा के धनी थे। उनकी कला में गहरी रुचि थी। जादू का भी शौक था। मेरे पिता बाबू लक्ष्मणसिंह एवं महाराजा हनुवन्तसिंह, दोनों जादू दिखाते थे। यह रिश्ता भी रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि पूर्व सांसद गजसिंह ने मुझे कार्यक्रम में आने के लिए जो निमंत्रण पत्र भेजा उसमें मेरे राजमाता से आत्मीय रिश्ते का उल्लेख किया। इससे मैं अभिभूत हुआ हूं। उन्होंने कहा कि जोधपुर की जनता का अपार स्नेह मुझे मिलता रहा है। इसकी बदौलत तीन बार मुख्यमंत्री, पांच बार सांसद, केन्द्रीय मंत्री एवं अन्य पदों पर रहा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में आजादी के 70 वर्ष बाद भी लोकतंत्र मजबूत है। पड़ोसी देश में बार-बार सैन्य शासन होता रहता है। उन्होंने राष्ट्र के निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इंदिरा गांधी के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने राजमाता कृष्णा कुमारी की स्मृति में उनके जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। 

समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद गजसिंह ने कहा कि राजमाता कृष्णा कुमारी मुख्यमंत्री को पुत्रवत मानती थीं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी उन्हें मां के रूप में सम्मान देते थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजस्थानी भाषा की मान्यता देने के संबंध में मांग की। गजसिंह ने कहा कि गहलोत ने अपने पहले कार्यकाल में भी सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा को मान्यता देने का प्रस्ताव विधानसभा से केन्द्र को भेजा था।

समारोह के मुख्य वक्ता एवं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने कहा कि भारत में बेहतर चुनाव प्रक्रिया है। चुनावों के परिणामों को सभी मान्यता देते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए स्टेट फन्डिंग होनी चाहिए। उन्होंने महाराजा हनुवंत सिंह के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। 

महापौर घनश्याम ओझा और सूरसागर विधायक श्रीमती सूर्यकांता व्यास ने भी सम्बोधित किया। इस दौरान विधायक श्री महेन्द्र विश्नोई, राजसीको के पूर्व चेयरमैन सुनील परिहार, जेडीए के पूर्व चेयरमेन राजेन्द्रसिंह सोलंकी, जोधपुर पूर्व राजपरिवार की सदस्य श्रीमती हेमलता राजे सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्रारम्भ में मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने महाराजा हनुवन्त सिंह एवं राजमाता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया। डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने स्वागत भाषण दिया।

समारोह में समाजसेवा के लिए मारवाड़ रावणा राजपूत सभा के अध्यक्ष गणपतसिंह चौहान व डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित का प्रशस्ति प्रदान कर सम्मान किया गया।