राजनीतिक / सतीश पूनियां का पलटवार कहा- गहलोत को पता होना चाहिए बांग तो मुर्गा देता है

Dainik Bhaskar : Nov 02, 2019, 01:11 PM

जयपुर | सीएम अशोक गहलोत द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां के लिए उनके नए-नए होने... और बांग देने जैसे सियासी हमलों के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूनियां के अध्यक्ष बनने के बाद आए विधानसभा चुनाव में भाजपा मंडावा की सीट हार चुकी है। अब उन पर संगठन के साथ निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का दबाव है। इधर सीएम अशोक गहलोत उन्हें राजनीति का नौसिखिया बता रहे हैं। वहीं अपनी ही पार्टी में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से उनकी तल्खियों की भी चर्चाएं बंद नहीं होती। ऐसे में पूनियां काे दाेहरी चुनाैती का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इन नई चुनौतियों को लेकर भास्कर ने पूनियां से किए सवाल-जवाब। 

सवाल- गहलोत ने कहा कि सियासत में आप नए नए हो, इसलिए ज्यादा बांग दे रहे हो?

पूनियां- गहलोत जी..... बांग तो मुर्गा देता है। मुझे लगता है कि किसी भी पार्टी में नए नेतृत्व के प्रति उनको ऐतराज है। जबकि उन्हें मुझे एप्रिशिएट करना चाहिए था। उनकी भाषा और मानसिकता ऐसी लगती है कि उन्हें राजनीति में नए लोग पसंद नहीं हैं।

सवाल- आप पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हो जो विपक्षी पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। राजनैतिक गलियारों इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं?

पूनियां- कोई सियासी मायने नहीं। उनसे दिवाली की रामा-श्यामा की थी। गहलोतजी ने मजाक में कहा था कि मेरी आपसे मिलने की इच्छा थी, लेकिन आपकी पार्टी क्या सोचती। मैंने कहा कुछ नहीं सोचती पार्टी…यह तो सामान्य सी बात है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से हमारी शिष्टाचार मुलाकात ही थी।

सवाल- कांग्रेेस का कहना है कि प्रदेश भाजपा पर आरएसएस का कब्जा है। संघ जो चाहता है यहां वहीं होता है। 

पूनियां- संघ के विचारों का अनुसरण तो हम हर परिस्थिति में करेंगे। कांग्रेस की तकलीफ यह है कि उनके पास ऐसा वैचारिक संगठन नहीं है। उनके विचार को लोगों ने नकार दिया और संघ के राष्ट्रवाद को स्वीकार किया है।

सवाल- निकाय चुनावों में आरएलपी से गठबंधन जारी रहेगा या आप अलग लड़ेंगे? बेनीवाल कह रहे हैं कि गठबंधन में रहना चाहते हैं।

पूनियां- मैंने हमारी चुनाव प्रबंधन समिति में यह बात रखी है। सैद्धांतिक सहमति यही बनी कि हम कोई गठबंधन नहीं करेंगे। शहरी निकायों में भाजपा अपने बूते पर लड़ती आई है। हां... अगर चेयरमैन में पार्षदों के समर्थन की बात की आएगी तो यह फैसला हमने कार्यकर्ताओं पर छोड़ा है।

 सवाल- प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद पहले उपचुनाव में आप मंडावा सीट बड़े अंतर से हारे। टिकट गलत बांटा या संगठन फेल रहा?

पूनियां- शेखावाटी में सहानुभूति बड़ा फैक्टर रहा है। मंडावा की जीत न कांग्रेस की थी न मुख्यमंत्री की थी और न ही सरकार की नीतियों की थी। रीटा को लेकर सहानुभूति थी। दूसरा यह भी रहा कि हमारे सांसद के बेटे को यहां टिकट नहीं मिला जो स्वाभाविक दावेदार थे। इसलिए एन वक्त पर हमें सुशीला को टिकट देना पड़ा।

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सवाल- गहलोत कह रहे हैं कि पहलू खान को ब्रांड एंबेसेडर बनाने में हर्ज क्या है पूरे देश की मीडिया को उन्हें ब्रांड एंबेसेडर बनाना चाहिए।

पूनियां- इससे गहलोत की तुष्टिकरण की मानसिकता है उसका यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे खुद स्वीकार कर रहे हैं कि पहलू खान को ब्रांड एंबेसेडर बनाना चाहिए।