अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय चीन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक दौरे पर हैं, जहां बीजिंग में उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई है। इस उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने वैश्विक कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं इस बात का खुलासा किया है कि बीजिंग में मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की वर्तमान वैश्विक स्थिति पर अत्यंत तीखी और सीधी टिप्पणी की और ट्रंप के दावों के अनुसार, जिनपिंग ने अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी कराते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका की ताकत अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है और संपूर्ण पश्चिमी जगत पतन की ओर अग्रसर है। इस बयान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब खुद व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप ने भी आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि जिनपिंग ने वास्तव में यह बात कही थी। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने आज शुक्रवार को अपने चीनी समकक्ष के इस विवादास्पद बयान को एक अलग दृष्टिकोण से पेश करने की कोशिश की और इसे जो बाइडेन के पिछले चार साल के कार्यकाल का परिणाम बताया।
जिनपिंग की टिप्पणी और ट्रंप का सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का इशारा उनके पूर्ववर्ती जो बाइडेन के कार्यकाल की ओर था, न कि उनके वर्तमान प्रशासन की उपलब्धियों की ओर। बीजिंग में जिनपिंग के साथ अपनी महत्वपूर्ण शिखर बैठक के दूसरे दिन की औपचारिक शुरुआत से पहले, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक अत्यंत लंबा और विस्तृत पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही सलीके और कूटनीतिक शिष्टाचार के साथ अमेरिका को एक ‘गिरता हुआ देश’ (Falling Nation) कहकर संबोधित किया, तो उनका वास्तविक इशारा उस भारी और अपूरणीय नुकसान की ओर था जो अमेरिका को ‘स्लीपी जो बाइडेन’ और उनके प्रशासन के चार साल के कार्यकाल के दौरान उठाना पड़ा था। ट्रंप ने अपने पोस्ट में जोर देकर कहा कि इस विशिष्ट मामले में शी जिनपिंग 100 फीसदी सही थे, क्योंकि बाइडेन के समय में देश वास्तव में पतन की ओर बढ़ रहा था और अपनी वैश्विक साख खो रहा था।
'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' का जिक्र और ऐतिहासिक संदर्भ
हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शी जिनपिंग ने ये बातें बंद दरवाजों के पीछे हुई किसी अत्यंत निजी बातचीत में कहीं या फिर बीजिंग में आयोजित किसी सार्वजनिक संवाद के दौरान। इस आधिकारिक दौरे के पहले दिन, जिनपिंग ने भले ही सार्वजनिक मंचों पर “गिरता हुआ देश” जैसे कड़े शब्दों का सीधा इस्तेमाल न किया हो, लेकिन उन्होंने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” (Thucydides Trap) में फंसने की संभावना के प्रति दुनिया को आगाह जरूर किया था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में यह एक ऐसा महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो प्राचीन काल में एथेंस के उदय से जुड़ा हुआ है, जब एथेंस की बढ़ती शक्ति ने स्पार्टा के स्थापित वर्चस्व को सीधी चुनौती दी थी। बीजिंग में कल गुरुवार को ट्रंप के साथ हुई द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान अपने शुरुआती भाषण में जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया आज एक नए दोराहे पर आ खड़ी हुई है और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चीन और अमेरिका मिलकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बाहर निकल सकते हैं और बड़े देशों के आपसी संबंधों का एक नया मॉडल तैयार कर सकते हैं।
16 महीनों की जोरदार तरक्की और भविष्य की संभावनाएं
हार्वर्ड के प्रोफेसर ग्राहम एलिसन ने इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया था कि कोई भी स्थापित महाशक्ति अंततः किसी उभरती हुई शक्ति से तब टकराती है, जब उसे उस उभरती हुई शक्ति की तरक्की से अपनी सत्ता को खतरा महसूस होने लगता है। एलिसन ने इस सिद्धांत का नाम प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के नाम पर रखा था, जिन्होंने कहा था कि एथेंस का उदय और उससे स्पार्टा में पैदा हुआ डर ही युद्ध की मुख्य वजह थी। अपने पोस्ट में ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनके राष्ट्रपतित्व काल के “16 शानदार महीनों” के दौरान अमेरिका ने अत्यंत जोरदार अंदाज में तरक्की की है। उन्होंने अमेरिका के फिर से उभरने के संकेतों के तौर पर रिकॉर्ड स्टॉक मार्केट, मजबूत रोजगार बाजार, नए निवेश के वादे, सैन्य ताकत और दुनिया भर में नए सिरे से बढ़े प्रभाव का विशेष रूप से जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जिनपिंग ने उनके प्रशासन की उपलब्धियों पर उन्हें बधाई दी। ट्रंप ने लिखा कि 2 साल पहले देश पतन की ओर था, जिससे वह सहमत हैं, लेकिन अब अमेरिका दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ देश है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर बनेंगे।
