जंगली

कॅटगरी एक्शन ,परिवार
निर्देशक चक रसेल
कलाकार अक्षय ओबेरॉय,अतुल कुलकर्णी,आशा भट,थलइवसाल विजय,पूजा सावंत,विद्युत जामवाल
रेटिंग 3/5
निर्माता विनीत जैन
संगीतकार पति उद्दीन
प्रोडक्शन कंपनी जंगल की तस्वीरें
रिलीज़ दिनांक 29-Mar-2019
अवधि 01:55:00

Junglee Movie Review: हाथियों को बॉलीवुड में इतनी बार कहानी की मेन थीम में रखा गया है कि विद्युत जामवाल की फिल्म के लिए कुछ नया करना मुश्किल ही था। हाथियों के रंग, उनके खेल, हाव भाव को कई बार हिंदी फिल्मों में दिखाया गया है। इस फिल्म में भी एक बार फिर मानव और इस भारी भरकम जीव के साथ रहने की घिसी पिटी कहानी को दोहराया गया है।इस फिल्म के ट्रेलर को देख कर लगा था कि ‘हाथी मेरे साथी’ का एक मज़ेदार रीमेक हमारे सामने होगा लेकिन इस कहानी में सबकुछ कम ही रह जाता है।

इस फिल्म की शुरुआत कुछ बेहतरीन दृश्यों के साथ होती है जिसमें एक हरे भरे जंगल में हाथियों के झुंड को दौड़ते हुए दिखाया गया है और इसी जंगल में मौजूद है, चंद्रिका, जो एक वन्य सरंक्षण केंद्र है। इस केंद्र को एक बूढ़े बाबा अपने स्टाफ के साथ मिलकर चलाते हैं। बाबा का बेटा राज नायर (विद्युत), पशु चिकित्सक, अपने जानवरों को बहुत अच्छे से जानता है फिर चाहे वो तोते हों, साँप हो या फिर हाथी। पिता और बेटे के बीच कुछ अनसुलझे मुद्दे हैं जिनकी वजह से बेटा, पिता से दूर शहर में रहता है। इस सब के बीच शिकारियों का एक गिरोह भी है जो हाथियों के झुंड के सरगना भोला को मारना चाहता है।

अफसोस इस बात का है कि जहां लेखक रितेश शाह को आसानी से इस कहानी को राज और शिकारियों के बीच की जंग की तरह से दिखाना था, वो इसके लिए बहुत समय ले लेते हैं। इस कहानी में बहुत सारा मज़ा, जानकारी जोड़ी जा सकती थी लेकिन कहानी बोझिल है और दिल को छूती नहीं है। वैसे ये जानना दिलचस्प होगा कि हाथी मेरे साथी, जो की एक दक्षिण भारतीय फिल्म का रीमेक थी, के लेखक सलीम-जावेद थे। लेकिन चक रसल और एडम प्रिंस का स्क्रीनप्ले बहुत कमज़ोर है और फिल्म न हॉलीवुड की रह पाती है और न ही बॉलीवुड की ही बन पाती है।

विद्युत जामवाल उन चंद हीरोज़ में से हैं जो टाइगर श्रॉफ की तरह एक्शन स्टंट को कर सकते हैं। जंगली में वो इसे हाइलाइट भी करते हैं लेकिन ज़रुरत से ज्यादा समय इस पर ही लगाया है। हमारा हीरो, जंगल का असली बेटा है इस पर कई सारे क्लोज़ अप और एक्शन शॉट खराब किए गए हैं। जब तक कहानी शुरु होती है तब तक ऑडियंस बोर हो चुकी होती है। फिल्म में अतुल कुलकर्णी और अक्षय ओबेरॉय जैसे कलाकारों को बिल्कुल वेस्ट कर दिया गया है। फिल्म में दो लड़कियों ने डेब्यू किया है और आशा भट्ट और पूजा सावंत अपना काम ठीक से करते हैं लेकिन स्क्रिप्ट में उनके लिए कुछ खास काम था ही नहीं।