स्पोर्ट्स / हैप्पी बर्थडे ऋषभ पंत: 12 साल में अंडर-12 टूर्नामेंट में तीन शतक लगाए और मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे

News18 : Oct 04, 2019, 12:10 PM

Happy Birthday Rishabh Pant | भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के तूफानी विकेटकीपर बल्‍लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) आज 22 साल के हो गए हैं. 4 अक्‍टूबर 1997 को पैदा हुए इस खिलाड़ी ने काफी कम उम्र में बड़ा नाम कमाया है और ऐसे कारनामे कर दिए हैं जो बड़े-बड़े खिलाड़ी नहीं कर पाए. अपनी तूफानी बल्‍लेबाजी के लिए मशहूर पंत भले ही अभी भारतीय टेस्‍ट टीम का हिस्‍सा न हों लेकिन पिछले एक साल में उन्‍होंने ऐसे कमाल किए हैं जिनकी बदौलत उनकी वापसी तय कही जा सकती है. पंत ने सफलता की सीढ़ियां काफी तेजी से चढ़ी हैं. 2016 के2016 के अंडर-19 वर्ल्‍ड कप में अपनी बल्‍लेबाजी से छाप छोड़ने के बाद केवल 3 साल के अंदर ही इस बल्‍लेबाज ने टीम इंडिया का तीनों फॉर्मेट- टी20, वनडे और टेस्‍ट में प्रतिनिधित्‍व कर लिया. साथ ही आईसीसी क्रिकेट वर्ल्‍ड कप में खेलने का तजुर्बा भी हासिल कर लिया. उन्‍हें भारतीय क्रिकेट का आने वाला कल कहा जाता है.

दिग्‍गजों के कोच को बनाया गुरु

उत्‍तराखंड के रुड़की में पैदा हुए पंत को क्रिकेटर बनने का रास्‍ता आसान नहीं था. जिस समय वे खेलना सीख रहे थे उस समय उत्‍तराखंड में क्रिकेट का कोई भविष्‍य नहीं था. ऐसे में दिल्‍ली उनके लिए बड़ा मौका था. यहां पर शिखर धवन, आकाश चोपड़ा, आशीष नेहरा, अतुल वासन, अजय शर्मा और अंजुम चोपड़ा सरीखे क्रिकेटरों के गुरु रहे तारक सिन्‍हा (Tarak Sinha) की शरण में पंत आए.

तारक सिन्हा ने पंत से जुड़ा एक रोचक किस्सा बताया था कि उनका क्‍लब एक टैलेंट हंट का आयोजित करता था. पंत ने जब इसके बारे में सुना तो वह इसमें हिस्सा लेने के लिए अपनी मां के साथ आए. तब वह महज 12 साल के थे. पंत ने अंडर-12 टूर्नामेंट में तीन शतक लगाए और मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे. अपनी प्रतिभा के दम पर सोनेट में अपनी जगह बनाई और फिर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते गए.

गुरुद्वारे में ठहरे, लंगर खाकर चलाया काम

पंत जब अपनी किस्मत आजमाने रुड़की से दिल्ली आए तो यहां न वे किसी को जानते थे और न ही रहने का ठिकाना था. मगर ‌उन्होंने तय कर लिया था कि हार के रुकना नहीं है, दोगुने दम के साथ डटे रहना है. जब कहीं से कोई उम्मीद नहीं दिखाई दी तो ऊपर वाले का ही आसरा था, जिसने निराश भी नहीं किया. आखिर मोतीबाग के गुरुद्वारे में रहने का ठिकाना मिला. पंत वहीं ठहरते, वहीं से लंगर खाकर प्रैक्टिस के लिए निकल पड़ते. मां गुरुद्वारे में सेवा करतीं और पंत क्रिकेट में रम गए. यह सिलसिला कई महीनों तक चला. धीरे-धीरे पंत अपनी मेहनत के बल पर नए मुकाम हासिल करते गए और फिर किराये पर कमरा ले लिया.