बिजनेस / भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर कर सकता है बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती

Dainik Jagran : Oct 03, 2019, 12:52 PM

मुंबई | देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए अब तक उठाये गए कदम नाकाफी प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक शुक्रवार को साल में लगातार पांचवीं बार बेंचमार्क ब्याज दरों में एक बार फिर कटौती की घोषणा कर सकता है। महंगाई दर के काबू में होने की वजह से भी इस बात की संभावना काफी प्रबल मानी जा रही है। 

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो रिजर्व बैंक शुक्रवार को रेपो रेट में 0.25 फीसद की कटौती की घोषणा कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो दर घटकर 5.15 फीसद पर रह जाएगा। केंद्रीय बैंक इस साल अब तक रेपो रेट में 1.10 फीसद की कटौती कर चुका है। अगर चार अक्टूबर को रेपो रेट में 0.25 फीसद की कटौती होती है तो एक साल में रेपो रेट में कुल कटौती 1.35 फीसद की हो जाएगी।

अधिकतर विश्लेषकों की राय है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में अपनी अगली द्विमासिक बैठक में भी रेपो दर में 0.15 फीसद की कमी करेगा। 

हालांकि, अगस्त में रेपो रेट में 0.35 फीसद की कटौती के बाद कई विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि जीडीपी वृद्धि को नई जान देने के लिए केंद्रीय बैंक इस सप्ताह अपनी समीक्षा बैठक में रेपो दर में 0.40 फीसद तक की कमी कर सकता है।   

यस बैंक में अर्थशास्त्री युविका ओबेरॉय ने कहा, ''मौजूदा समय में महंगाई दर के काबू में होने के कारण हम उम्मीद कर रहे हैं कि आर्थिक वृद्धि को मजबूती देने में अपनी भूमिका जारी रखने के लिए आरबीआई अपनी समीक्षा बैठक में दरों में 0.40 फीसद तक की कटौती कर सकता है।''

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर जून तिमाही में घटकर पांच फीसद पर रह गई थी। यह 2013 के बाद सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाती है। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक को चालू वित्त वर्ष में 6.9 फीसद की वृद्धि दर के अनुमान को घटाना होगा।

हालांकि, कई अर्थशास्त्री दरों में बहुत अधिक कटौती को लेकर सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक कुछ चीजों को रिजर्व में रखेगा और महंगाई में वृद्धि की गति को देखने के बाद ही इस बारे में कोई निर्णय करेगा। 

सरकार ने देश में कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सितंबर में कॉरपोरेट टैक्स में भारी कटौती का ऐलान किया था। हालांकि, कर में कटौती से भारत कारोबार की लागत के हिसाब से एशियाई के अन्य बाजारों के मुकाबले में आकर खड़ा हो गया है। हालांकि, इससे लोगों को खर्च करने के लिए नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोई उम्मीद नहीं है। 

कोटक महिंद्रा बैंक में कंज्यूमर बैंकिंग की प्रमुख शांति एकम्बरम ने कहा, ''कच्चे तेल की कीमतों में हाल में आई उतार-चढ़ाव और सरकार की ओर से घोषित वित्तीय कदमों से मध्यम अवधि में महंगाई दर और राजकोषीय घाटे पर असर देखने को मिलेगा।''